Wednesday, July 27, 2016

उच्च-नीच ग्रह

ग्रहों के उच्च-नीच  के बोध से कुंडली का फलादेश स्पष्ट रूप से किया जा सकता है। प्रायः उच्च का ग्रह शुभ फल और नीच का ग्रह अशुभ फल प्रदान करता है।


Functional Nature of Planets

The functional nature of planets is the key analytical factor in the horoscope analysis. Besides Rahu and Ketu, the planets, whose mooltrikona signs are in malefic houses (sixth, eighth and twelfth) with reference to the ascendant, act as functional malefic planets in a nativity.

For various ascending signs, the functional malefic planets are mentioned hereunder:


The functional nature of any planet depends on the nature of mooltrikona house of that planet. It is not related to the strength of the planet. A planet may be weak or strong but the functional nature will remain same as per the defined principle for identifying the functional nature of planets. 

In exceptional cases, when Rahu is well placed in a mooltrikona sign of a planet, without causing any conjunction or close aspect with other houses and planets and its dispositor is strong, Rahu gives good results during its sub-periods for materialistic prosperity. Rahu-Ketu, when exalted, give materialist benefits while debilitated Rahu involves the native in exposed scandals and acute physical sufferings. 

The functional malefic for various ascendants may appear to be at variance when seen in the context of the available classical texts, but when we analyze the charts based on the functional malefic planets we would find that all of our confusions disappear at one stroke. 

The classical principles were laid down by Maharishi Parashara in Dwapara yuga and changes, mutatis mutandis (wherever necessary) have been suggested for the nativities in the Kaliyuga. 

The functional benefic planets for various ascending signs are as under:-


THE MOST MALEFIC PLANET

If there is a mooltrikona sign in the eighth house from the ascendant, it lord is called the most malefic planet (MMP). In case there is no mooltrikona sign in the eighth house then the role of the most malefic planet is played by the lord of the twelfth house containing a mooltrikona sign. And, if there is no mooltrikona sign in the twelfth house too, then the role of the most malefic planet is played by Ketu. For various ascendants the most malefic planets are as under:-



If the planet or the lord of the house, with which the most malefic planet is forming a close conjunction/aspect is strong and well placed, this most malefic planet creates tension(s) with regard to the matter represented by the house/planet involved. When the afflicted planet is weak and badly placed, it results in tragic happenings. In the case of the afflicted planets, besides their general significations, the significations of the house where the mooltrikona sign is placed, and the significations of the house where the planet is placed, also suffer. 

THE MOST BENEFIC PLANET

If there is a mooltrikona sign in the fourth house from the ascendant, its lord is called the most benefic planet (MBP). In case there is no mooltrikona sign in the fourth house, then the role of the most benefic planet is played by the lord of the second house containing the mooltrikona sign. In case there is no mooltrikona sign in the second house, then the role of the most benefic planet is played by the lord of the ninth house containing the mooltrikona sign. And if there is no mooltrikona sign in the ninth house too, then the role of the most benefic planet is played by the lord of the third house containing the mooltrikona sign. For various ascendants the most benefic planets are as under:-


General Significations of Planets

OWN SIGN

A planet in its own sign is treated as strong and is capable of generating the expected results, provided it is otherwise strong. The own signs of various planets are as under:-



MOOLTRIKONA SIGN

A planet in its mooltrikona (MT) sign is treated as very powerful, provided it is otherwise strong. The Mooltrikona signs of various planets are as under:-


Few consider Taurus as Mooltrikona sign for Moon

EXALTATION 

The planets are in the state of Exaltation in particular signs and give good results by promoting/protecting their general and particular significations, provided they are otherwise strong. The Exaltation signs of various planets are as under:-


DEBILITATION 

The planets are in the state of debilitation in particular signs, and therefore weak, failing to fully protect/promote their general and particular significations. Rather, there can be deterioration in their ruling sub-periods. The Debilitation signs of various planets are as follows:


COMBUSTION

Whenever a planet comes very near to the Sun, it is divested of its brightness. The said state is called combustion. In this state, the planets fail to fully protect/promote their general and particular significations. If such as planet is weak on their accounts too, the significations ruled by them do not even take birth. The planets are said to be combust when they are within the below mentioned degrees on either side of the Sun. 

Sunday, July 17, 2016

तिजोरी कहाँ हो?

व्यापार हो या  घर,धन को रखने का उचित पात्र है तिजोरी या कैश बॉक्स। पहले जमीन के अंदर धन गाड़ने का चलन था, यह भी वास्तु के अनुसार अनुचित है। तिजोरी के सही स्थान और दिशा के बारे में मतभेद हैं। कई वास्तु शास्त्री कहते हैं कि यह मकान या दुकान के दक्षिण-पश्चिम में रखनी चाहिए तो कई का मानना है कि इसे उत्तर क्षेत्र में रखना चाहिए। वास्तु शस्त्र के अनुसार उत्तर दिशा का स्वामी कुबेर है और तिजोरी या कैश बॉक्स पर कुबेर का ही अधिकार होता है। अतः उत्तर दिशा में ही कमरा बनना चाहिए। इस कमरे के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में तिजोरी का स्थान होना चाहिए। 

निम्नलिखित बातों का ध्यान रखने से निश्चय ही धन में वृद्धि होगी:-
  • तिजोरी को कभी भी ज़मीन या फ़र्श पर न रखें। 
  • इसे कुछ ऊँचे स्थान पर रखें तथा दक्षिण या पश्चिम की दीवार से सटी हुई न रखें। 
  • यह दूरी कम से कम दो इंच की होनी चाहिए। 
  • तिजोरी का पल्ला सदा उत्तर की ओर ही खुले। 
  • दरवाज़े के ठीक सामने तिजोरी नहीं होनी चाहिए। 
  • तिजोरी वाले कमरे में कोई नाली न हो। 
  • जिस कमरे में तिजोरी रखी जा रही है उस कमरे की ऊँचाई अन्य कमरों से नीची नहीं होनी चाहिए। 
  • तिजोरी को चौकोर या आयताकार ही रखना चाहिए। 
  • तिजोरी को कभी भी खाली नहीं रखना चाहिए। 
  • तिजोरी में स्फटिक का श्री यन्त्र रखने से धन में वृद्धि होती है। 
  • इस में धन के अतिरिक्त अन्य कागज़ और फाइल इत्यादि नहीं रखने चाहिए। 
  • बैंक की एफ० डी० या पोस्ट ऑफिस के बांड इत्यादि वित्तीय प्रपत्र (Financial Instruments) रखे जा सकते हैं। 
  • कमरे में डेढ़ इंच ऊंचाई की दहलीज़ भी होनी चाहिए। 
  • ध्यान रहे तिजोरी के सामने भगवान की तस्वीर न हो। आवश्यक होने पर तस्वीर पूर्व की दीवार पर लगाएं।
  • तिजोरी को कोने में न रखे और साथ में यह झुकी हुई भी नहीं हो। 
  • अगर आप ने अलमारी में बनाई है तो इस बात का ध्यान रखें कि इसे सबसे नीचे के खाने में न बनाया जाए। इसे सबसे ऊपर या मध्य भाग में बनाया जा सकता है।  
  • जिस कक्ष में तिजोरी रखी जा रही है उस कक्ष की प्रतिदिन सफ़ाई करनी ज़रूरी है। 
  • तिजोरी की पूजा भी प्रतिदिन करें। 
  • तिजोरी बीम या दुछत्ती के नीचे न रखें। 
  • तिजोरी को लाल, काले या नीले रंग से नहीं रंगना चाहिए। 

Saturday, July 16, 2016

बृहस्पति जी का कन्या राशि में गोचर (Jupiter Transit in Virgo)


बृहस्पति सूर्य से पांचवाँ और हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। बृहस्पति सामान्यतः आकाश में सबसे चमकदार निकाय है। देवगुरु बृहस्पति जी का रंग पीला है जो धन और ज्ञान से जुड़े मामलों को नियंत्रित करते हैं।इनके सिर  पर स्वर्णमुकुट और गले में सुंदर माला है और यह कमल के आसन पर विराजमान हैं। इनके चार हाथों में क्रमशः दण्ड, रुद्राक्ष की माला, पात्र और वरमुद्रा सुशोभित है। मनुष्य जीवन पर बृहस्पति गहरा असर छोड़ते हैं। अगर कुंडली में बृहस्पति कमजोर हों तो परेशानियां बढ़ती चली जाती हैं क्योंकि कहा जाता है कि किसी भी चीज़ को यह विशाल रूप देते हैं।  नवग्रहों में बृहस्पति जी को गुरु और मंत्रणा का कारक माना गया है। यह स्वभाव से नम्र ग्रह है। कालपुरुष की सिद्धांतनुसार बृहस्पति को सातवें व नवें घर का कारक माना गया है। बृहस्पति कर्क राशि में उच्च और मकर राशि में नीच का प्रभाव देते हैं। 

बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी हैं और इनकी महादशा १६ वर्ष की होती है। किसी भी राशि पर इनका गोचर लगभग १३ मास के लिए होता है। देवगुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन ज्योतिष के दृष्टिकोण से एक बड़ा बदलाव होता है।

बृहस्पति गोचर में ११ अगस्त २०१६ (गुरुवार) को २२:२४ पर अपने परम मित्र सूर्य की सिंह राशि को छोड़कर वैचारिक शत्रु बुध की कन्या राशि में प्रवेश करेंगे और १२ सितम्बर २०१७ (मंगलवार) ७:५९ पर्यन्त इसी में भ्रमण करेंगे। बृहस्पति जी इस दौरान अपने तीन मित्र नक्षत्रों में गोचर करेंगे। यह तीन नक्षत्र हैं - उत्तराफ़ाल्गुनी (सूर्य का नक्षत्र), हस्त (चन्द्र का नक्षत्र) और चित्रा  (मंगल का नक्षत्र)। यह ग्रह-नक्षत्र स्थिति/संबंध  विभिन्न तरीकों से शुभाशीश प्रदान करेगी:-

बृहस्पति-सूर्य संबंध - करियर में वृद्धि (Career Growth) के लिए उत्तम है। 
बृहस्पति-चन्द्र संबंध - आर्थिक प्रबंध और धन-संपत्ति (Finance & Wealthके लिए उत्तम है। 
बृहस्पति-मंगल संबंध - विषयी प्रसन्नता (Material Happinessप्रदान करने में सक्षम होगा।  

बृहस्पति जी कन्या राशि में होने के बावजूद अनुकूल परिणाम प्रदान करने में पूर्ण रूप से सक्षम होंगे। अन्य ग्रहों के नकारात्मक परिणामों को बृहस्पति जी की कृपा प्राप्त कर के दूर करने का यह सर्वोचित समय है। 

बृहस्पति जी का कन्या राशि में गोचर चन्द्र राशि वृषभ, सिंह, वृश्चिक और मकर के लिए विशेष रूप से लाभदायक होगा। चन्द्र राशि धनु और मीन के लिए सामान्य फल  प्रदान करेगा।  चन्द्र राशि मेष, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला और कुम्भ के लिए इसके परिणाम अत्यन्त अनुकूल नहीं होंगे। 

विभिन्न राशियों पर इस गोचर का प्रभाव :-

मेष राशि - मेष राशि वाले जातकों में बृहस्पति का गोचर छठे भाव में हो रहा है। वर्ष पर्यन्त आपको आपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। बृहस्पति यहाँ बैठकर कर्म, व्यय तथा धन स्थान को देख रहे है अतः सफलता मेहनत के बाद ही प्राप्त होगी। आपके पराक्रम में वृद्धि व विरोधियों से संघर्ष करने की क्षमता का विकास होगा। किसी के द्वारा भड़काने पर शीघ्र उत्तेजित न हो और यथा-संभव वाद-विवाद से बचने का प्रयास करें। आर्थिक एवं पारिवारिक मामलों के लिए समय अनुकूल रहेगा। आकस्मिक धन लाभ की संभावना है। नए कर्जें लेने से बचें। लम्बे समय से चले आ रहे कर्ज़ों या देनदारियों के निपटान के प्रबल योग हैं। लम्बी दूरी की यात्राएँ लाभदायक सिद्ध होंगी।  

वृषभ राशि - बृहस्पति का गोचर आपके पंचम भाव में होने जा रहा है। पंचम भाव लक्ष्मी, संतान, बुद्धि, प्यार, शेयर मार्किट इत्यादि का भाव है अतः जातक को इनसे संबंधित शुभ-अशुभ दोनों समाचार मिलेंगे।  संतान और शिक्षा से जुड़े मामलों में भी अनुकूलता रहेगी। ग़लत निर्णय परेशानियों में डाल सकते है। महत्त्वपूर्ण गतिविधियों में विलम्ब हो सकता है। सफलता आप के आत्मविश्वास में वृद्धि करेगी। बृहस्पति जी के अष्टमेश होने के कारण परिश्रम करने से, कुछ अड़चनों के बाद, अच्छी धन प्राप्ति भी संभावित है। अष्टमेश की प्रथम भाव पर दृष्टि पेट व पाँव में कुछ तकलीफ दे सकती है लेकिन कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा तथा नए मित्र भी बनेगे। धर्म स्थलों पर जाने तथा धार्मिक कार्यों से जुड़ने का अवसर भी मिल सकता है। अविवाहित जातकों को ईश्वर की अनुकम्पा से जीवन साथी मिल सकता है। जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार रहे। यह गोचर आपके मान-सम्मान को बढ़ाने वाला होगा। 

मिथुन राशि - मिथुन राशि के जातकों के लिए यह गोचर चतुर्थ भाव में होगा। अतः चतुर्थ भाव संबंधित फल जैसे नई गाड़ी, नया घर इत्यादि दृष्टिगोचर होंगे। घर परिवार में सौहार्द पूर्ण वातावरण बना रहेगा। आपके सामाजिक तथा पारिवारिक मान-सम्मान, कार्यक्षेत्र में वृद्धि होगी तथा मेहनत का पूर्ण फल मिलेगा। यदि आप नौकरी या व्यापर में कुछ बदलाव या और भी पूँजी लगाने की सोच रहे हैं तो समय इसके लिए अनुकूल है। बड़े अधिकारियों और शक्तिसंपन्न व्यक्तियों से जुड़ाव होगा। मान-सम्मान में वृद्धि संभावित है। माँ के स्वास्थ्य, ड्राइविंग से अपनी संभावित दुर्घटना और खर्चों पर नियंत्रण इत्यादि ध्यान देने योग्य विषय हैं। 

कर्क राशि -  बृहस्पति का यह गोचर आपके तीसरे भाव में हो रहा है।आप मेहनत से भाग्य का निर्माण करने में सफल होंगे। यह आप के छठे एवं नवम भाव का स्वामी है। अतः आपके भीतर नए कार्यों के प्रति रूचि बढ़ेगी।एक नए आत्मविश्वास का संचार होगा, लेकिन अत्यधिक आत्मविश्वास में आकर पड़ोसियों व भाईयों से विवाद करने से बचें। अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा का निर्णय लें। मित्र-भाईयों व सहयोगियों से ज़रुरत पड़ने पर सहयोग मिलेगा। तृतीय भाव से बृहस्पति अपनी पंचम दृष्टि से सप्तम भाव को देख रहा है अतः अविवाहित जो विवाह की इच्छा रखते हैं उनके विवाह के योग बनेंगे। विवाहितों का जीवन सुखद रहेगा।  मामा के यहाँ कोई शुभ कार्य होने पर आपको वहां जाने का अवसर प्राप्त होगा। 

सिंह राशि - बृहस्पति का यह गोचर आपके दूसरे भाव में हो रहा है। आपके पांचवें व आठवें भाव के स्वामी होने से बृहस्पति आर्थिक मामलों में आपके मददगार बनेंगे। आप धन की बचत कर सकेंगे, साथ ही कही से अचानक धन की प्राप्ति भी संभावित है। रुका हुआ धन भी मिल सकता है। घर में किसी बच्चे के जन्म लेने का योग बन रहा है। कोई मांगलिक कार्य भी हो सकता है। प्रेम-प्रसंगों में अनुकूलता रहेगी। वाहन सावधानी से चलाएं।  आँख और दांत संबंधी परेशानी हो सकती है। पिताजी का स्वास्थ्य ख़राब हो सकता है इससे उनके कार्यक्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है। 

कन्या राशि - बृहस्पति आपके पहले भाव में आ रहे हैं और यह आपके चतुर्थ और सप्तम भाव के स्वामी भी हैं अतः आपको मानसिक प्रसन्नता प्रदान करेंगे। आप अपने कुछ महत्त्वपूर्ण निर्णयों के कारण घर-परिवार के माहौल को बेहतर बना पाएंगे। आय में वृद्धि होगी परन्तु कभी-कभी रूकावट भी आयेगी। विवाह की आयु है और आप अगर अविवाहित हैं तो विवाह के योग बनेंगे। प्रेम-प्रसंग के लिए भी गोचर अनुकूलता लिए हुए है। परिवार में कोई शुभ संस्कार भी हो सकता है। कार्यस्थल पर उच्च अधिकारियों का सहयोग भी मिलेगा जिससे कार्यक्षेत्र में वृद्धि व पदोन्नति के योग भी बनेगे। किसी पर अन्धविश्वास न करें विशेष रूप से किसी भी क़ानूनी काग़ज़ात पर हस्ताक्षर करने से पूर्व अच्छे से सोच लें। किसी की जमानत लेने से बचें। 

तुला राशि - बृहस्पति आप के तीसरे और छठे भाव के स्वामी हैं।  यह गोचर आपके बारहवें भाव में हो रहा है जो अधिक शुभ नहीं माना गया है। कुछ लोग बेवजह आप को परेशान कर सकते हैं। आत्मविश्वास की कमी रह सकती है। आलस्य और नकारात्मक सोच बढ़ेगी परिणामस्वरूप आप मानसिक रूप से परेशान होंगे। भागदौड़ अधिक हो सकती है। व्यर्थ की लम्बी दूर की यात्राओं के योग हैं जो लाभ देने में अक्षम होंगी। पास-पड़ोस में संबंध बना कर रखें। व्यर्थ के खर्चों से बचें। अनैतिक संबंध बन सकते हैं जिससे  पत्नी से अकारण विवाद हो सकता है। अगर साझेदारी में हों तो धैर्य बना कर रखे अन्यथा परिणाम भयंकर हो सकते हैं। ईश्वर आराधना कल्याणकारी सिद्ध होगी। 

वृश्चिक राशि - बृहस्पति जी का यह गोचर आपके लाभ भाव में हो रहा है। आपके दूसरे और पांचवे भाव के स्वामी होने के कारण आर्थिक मामलों के लिए यह गोचर काफ़ी अनुकूलता संजोए हुए है। प्रबल धन योग बन रहा है अतः धन कमाने का कोई नया रास्ता मिल सकता है। यदि अपनी शिक्षा या संतान के लिए कुछ करने की सोच रहे हैं तो उसमे सफलता मिलने के योग बन रहे हैं। आपके बड़े भाई का सहयोग मिलेगा। इस अवधि में आप में दार्शनिकता की झलक भी देखने को मिलेगी। यदि विवाह की आयु है तो उसमें सफलता मिलने के योग बन रहे हैं अथवा घर में कोई मांगलिक कार्य होने की संभावना प्रबल है। बहुत ज़्यादा उम्मीदें निराशा का कारण हो सकती हैं। बचत करने में  परेशानी हो  सकती है। मित्रों का पूर्ण समर्थन शायद प्राप्त न हो सके। 

धनु राशि - गुरु का गोचर आपके कर्म भाव यानि दसवें भाव में हो रहा है। आपकी राशि का स्वामी और चतुर्थेश होने के कारण कर्मों में तुलनात्मक रूप से शुद्धता का आना स्वाभाविक है जिससे आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। आपकी माँ का साथ और आशीर्वाद दोनों आपको प्राप्त होंगे। आप व्यापर-व्यवसाय में बहुत अच्छा करेंगे। व्यवसाय में विस्तार के लिए यह अनुकूल समय है। व्यवसाय और नौकरी को लेकर की गई यात्राएँ  सुखद रहेंगी। नौकरी में पदोन्नति भी मिलेगी। मान-सम्मान, घरेलु जीवन, वाहन व भूमि-भवन आदि के मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। नया मकान ले सकते हैं या पुराने का सौंदर्यकरण करा सकते हैं। स्वास्थ्य उत्तम बना रहेगा। परिवार का माहौल सौहार्दपूर्ण रहेगा। अत्यधिक तनाव से बचें। 

मकर राशि - बृहस्पति जी आपके द्वादश और तीसरे भाव के स्वामी हैं और इनका गोचर आपके नवम भाव (भाग्यस्थान) में हो रहा है अतः यह गोचर आपको मिले-जुले परिणाम ही दे पाएगा। एक ओर यह गोचर आपके भाग्योदय में सहायक बनकर आपके भीतर उत्साह और विश्वास जगाएगा वहीं कुछ मामलों में बेकार की भाग-दौड़ भी करवाएगा। यात्राएं करनी पड़ सकती है और इससे आप को लाभ ही होगा। हालांकि आप किसी धार्मिक या सामजिक क्षेत्र के मुखिया अथवा संत के संपर्क में आकर कुछ बेहतर कर सकते हैं। पड़ोसियों से संबंध सुधार कर साथ मिलकर किसी अच्छे कार्य को अंजाम दिया जा सकता है। भाग्यवादी होने के बजाय कर्म प्रधान बनें। विदेश प्रवास के लिए समय अनुकूल है प्रयास करें सफलता मिलेगी। मानसिक और बौद्धिक शान्ति के लिए योगाभ्यास करना लाभप्रद होगा। 

कुम्भ राशि - बृहस्पति जी आप के दूसरे और एकादश (लाभ) भाव के स्वामी हैं और इनका गोचर आप के अष्ठम भाव में हो रहा है। कार्यों में रूकावट आने से आपका मन अशांत रहेगा। धैर्य धारण करें समस्याओं का समाधान अवश्य निकलेगा। आप को आर्थिक  मामलों में बड़ी ही सावधानी से काम लेना होगा। अष्ठम भाव से धन भाव पर गुरु की दृष्टि होने से धन प्राप्ति की भी सम्भावना है परन्तु हो सके तो कोई बड़ा निवेश न करें न ही कोई बड़े निर्णय लें। परिजनों के साथ मनमुटाव से बचें। साधना करने के लिए यह समय अनुकूल है। तंत्र-मंत्र के जाल में फंस सकते हैं इससे बचना ही बेहतर विकल्प है। इस समय अध्यात्म की ओर प्रवृत्त हो सकते हैं। 

मीन राशि - बृहस्पति जी आप के राशि स्वामी होने के साथ-साथ कर्मेश भी हैं और इनका गोचर आपके सप्तम भाव में हो रहा है। साझेदारी के लिए यह समय उपयुक्त है। आपकी आकांक्षाओं की पूर्ति होगी। कार्यक्षेत्र में आप बेहतर कर पाएंगे। यदि किसी नये कार्य के बारे में सोच रहे हैं तो उसमें भी अनुकूलता ही प्राप्त होगी। विवाहित लोगों का विवाहित जीवन सुखी रहेगा। पत्नी का सहयोग मिलेगा आप भी उनकी ख़ुशी का ख्याल रखे और विश्वास बनाए रखें। विवाह की बात को आगे बढ़ाने में यह गोचर सहायक सिद्ध हो सकता है। आपकी साकारात्मक और निष्पक्ष बुद्धि-विवेक से यदि कोई वैवाहिक समस्या है तो शीघ्र ही दूर होगी। नवीन प्रेम की भी सम्भावना बनती नज़र आ रही है। मान-सम्मान में वृद्धि के योग भी प्रबल होंगे।

गोचर का विभिन्न राशियों पर प्रभाव सिर्फ एक चित्रण मात्र है। पाठकों से निवेदन है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले किसी विद्वान ज्योतिष से अपनी जन्मपत्रिका का विवेचन अवश्य करवा ले। ग्रह स्थिति, महादशा, षड्बल इत्यादि भी अपना फल अवश्य देते हैं। 

Friday, July 15, 2016

Introduction to the Charts

Main Chart Horoscope


The Rashi chart which is known as birth chart or natal chart can be drawn in many ways. North Indian Style is drawn as under:-


This is the best form of drawing a chart as it provides a very easy comprehension of the chart at a mere glimpse. It shows angles/planets placed in angles without enumeration. 

Angular houses (Kendra Sthanas) 1, 4, 7, 10 have been marked hereunder:-


Malefic Houses (Duh Sthanas) (6, 8, 12) - It shows whether any planet is posited in the malefic houses. The Sixth, Eighth and Twelfth houses in a chart are known as Malefic houses. Malefic houses have been marked hereunder :-



Trines (Trikona Sthanas) 1, 5, 9 - It shows the placement of planets in trines, if any, at a mere glimpse. The trinal position have been shown as under:-


Even reckoning of the aspects is very easy in this form of a birth chart. The houses are always fixed and are shown below:-


The lordship of the houses is reckoned from the placement of a sign in a particular house. In the following chart, for example, the sign Taurus rises in the ascendant. The counting of houses is done in an anti clockwise direction. 


As the sign Leo is placed in the fourth house, Sun will be the lord of the fourth house.  


General Significations of the Houses



Body Parts Ruled By the Various Houses



Relations Ruled By Various Houses


Thursday, July 14, 2016

विशेष स्वप्नों के विशेष फल

देवी - देवता 
  • स्वप्न में देवी का दिखाई देना प्रयोग में सफलता का सूचक है। 
  • स्वप्न में देवी किसी को अपनी गोद में लेकर ताज पहनती हुई दिखाई दे तो द्रष्टा के यश तथा पद की वृद्धि होती है। 
  • स्वप्न में  देवता का दिखाई देना सफलता का सूचक है।   

विद्यालय 
  • यदि विद्यालय में जाने का स्वप्न दिखाई दे तो वह द्रष्टा  के श्रेष्ठ चरित्र का परिचायक होता है। 
  • विद्यालय से भाग आने का स्वप्न दिखाई देना अच्छा तथा द्रष्टा की सर्वतोमुखी सफलता का सूचक होता है।
चीता 
  • स्वप्न में चीते का दिखाई देना द्रष्टा के सफलता के मार्ग में कठिनाइयों का सूचक होता है। 
  • यदि स्वप्न में चीता द्रष्टा पर आक्रमण करता हुआ दिखाई दे तो द्रष्टा की कठिनाईयां शीघ्र ही बढ़ जाती हैं। 
  • यदि स्वप्न में चीता किसी दूसरे व्यक्ति पर आक्रमण करता हुआ दिखाई दे तो द्रष्टा किसी गंभीर दुर्घटना के कारण बड़े संकट में पड़ता है। 
ढोलक 
  • यदि स्वप्न में कोई कुमारी स्त्री स्वयं को ढोलक बजाती हुई देखे तो उसका विवाह शीघ्र हो जाता है। 
  • यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में अपने घर ढोल बजता हुआ देखे तो उसके परिवार में पुत्र का जन्म  होता है। 
  • यदि द्रष्टा किसी उत्सव में स्वयं को ढोल बजाता हुआ देखे तो उसे कठिनाईओं का सामना करना पड़ता है।
मशीन 

  • यदि स्वप्न में पंचिंग मशीन दिखाई दे तो द्रष्टा को कोई उच्च पद प्राप्त होता है। 
  • यदि किसी व्यापारी को स्वप्न में पंचिंग मशीन दिखाई दे तो उसे व्यवसाय में बहुत लाभ होता है। 
  • यदि स्वप्न में अन्य प्रकार की मशीनें दिखाई दें तो व्यवसाय में असफलता मिलती है।
तितली 
  • यदि स्वप्न में कोई तितली के पीछे भागता है और उसे पकड़ लेता है तो उसका विवाह इच्छित लड़की के साथ हो जाता है परन्तु यदि तितली से बाहर निकल जाए तो उस लड़की का विवाह किसी अन्य व्यक्ति से हो जाता है। 
दस्तावेज़ स्याही 
  • यदि स्वप्न में कोई दस्तावेज़ अथवा बांड पर हस्ताक्षर करे तो उसे धन की हानि होती है। 
  • यदि स्वप्न में द्रष्टा किसी दुसरे व्यक्ति की कोई बांड दस्तावेज़ हस्ताक्षर के लिए देता है तो उसके धन एवं प्रभाव में वृद्धि होती है तथा नौकरी में पदोन्नति अथवा व्यवसाय में लाभ होता है। 
  • स्वप्न में स्याही दिखाई दे तो समस्त इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। 
आँखें  

  • यदि स्वप्न में आँखें लाल दिखाईं दें तो द्रष्टा को रोग होता है। 
  • यदि स्वप्न में अपनी आँखें सूजी हुईं  परन्तु बिना दर्द की दिखाई दें तो द्रष्टा का जीवन आनंदमय व्यतीत होता है। 
प्रार्थना 
  • यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में यह देखे कि वह अकेला ही अपने इष्ट देव की प्रार्थना कर रहा है तो यह समझना चाहिए कि उसकी सहायता के सभी दरवाज़े बंद हो गए हैं। 
  • यदि कोई पुरूष बहुत लोगों के साथ प्रार्थना करने का स्वप्न देखे तो उसकी सामाजिक स्थिति उन्नत होती है। 
  • यदि कोई प्रार्थना से अलग रहने का स्वप्न देखे तो उसके परिवार के  किसी सदस्य की मृत्यु होना संभव है। 
  • यदि कोई स्त्री इष्ट देव से प्रार्थना करने का स्वप्न देखे तो उसके पति तथा बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
बिल्ली 
  • यदि स्वप्न में बिल्ली दिखाई दे तो द्रष्टा के आचरण के विषय में ख़राब ख़बरें फैलती हैं। लोग उससे घृणा करते हैं। चोरी आदि के द्वारा उसे आर्थिक हानि भी होती है।  
  • स्वप्न में बिल्ली को पकड़ना अथवा मारना दिखाई दे तो द्रष्टा के घर में चोर-डाकू आते हैं परन्तु उसे कोई हानि नहीं पहुँचा पाते।  
  • स्वप्न में किसी भी रूप में बिल्ली का दिखाई देना अच्छा नहीं होता। 
भोजन 
  • यदि स्वप्न में स्वयं को भोजन करता हुआ देखे तो द्रष्टा को कोई रोग होता है। 
  • यदि स्वप्न में स्वयं को चावल खाते देखें तो यह इच्छा पूर्ण होने का या शुभ समाचार मिलने का सूचक है। 
  • स्वप्न में भोजन की वस्तुओं का दिखाई देना व्यवसाय में साधारण सफलता का सूचक होता है। 
  • यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति हल्का भोजन करे तो द्रष्टा को खेल में विजय प्राप्त होती है। 
छिपकली 
  • यदि स्वप्न में अपने शरीर पर छिपकली गिरती दिखाई दे तो बीमारी होगी। 
  • यदि कोई स्त्री स्वप्न में अपने कपड़ों पर छिपकली गिरती हुई देखें तो कुछ अनिवार्य कारणों से  कुछ दिनों के लिए  पति से वियोग होता है।
  • यदि स्वप्न  में दो छिपकलियां लड़ती हुई  दिखाईं दें तो परिवार पर भारी आपत्ति आएगी। 
  • यदि स्वप्न में छिपकली काटे तो बच्चे बीमार होंगे, यह समझना चाहिए। 
  • स्वप्न में छिपकली का दिखना उद्योगों में सफलता का सूचक समझना चाहिए। 
चूहा 

  • स्वप्न में चूहा दिखाई दे तो समझना चाहिए कि द्रष्टा के अनेक शत्रु होंगे। 
  • स्वप्न में चूहे फंसना यह सूचित करता है कि द्रष्टा शत्रुओं के षड़यंत्र का शिकार होगा। 
  • स्वप्न में मरा हुआ चूहा दिखाई देना द्रष्टा के अच्छे दिनों का सूचक होता है। 
  • स्वप्न में चूहा काटता हुआ दिखाई दे तो कोई भारी दुर्घटना टल गई है, यह समझें। 
  • स्वप्न में बहुत से चूहे दिखाई दें तो द्रष्टा को प्रत्येक क्षेत्र में असफलता मिलती है।  
गाय 

स्वप्न में गाय दिखाई देना अत्यन्त ही शुभ लक्षण है। गाय सभी कामनाओं की पूर्ति की संभावना व्यक्त करती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार गाय, दुग्ध उत्पाद जैसे दही, घी, पनीर इत्यादि के स्वप्न जातक के जीवन में आने वाले सकारात्मक परिवर्तनों का संकेत देते हैं। 
  • अगर गाय सिर्फ खड़ी या चरती नज़र आये तो द्रष्टा को धन, शान्ति और परिवार/समाज में उच्च पद की प्राप्ति होती है। जल्दी ही वह व्यक्ति अपने किसी अच्छे कार्य के लिए समाज में सम्मानित होता है और उसके पारिवारिक धन संपत्ति में वृद्धि होती है। 
  • स्वप्न में यदि सफ़ेद गाय हो तो चांदी और चीनी के व्यापार में लाभ और व्यापार लाभ होता है। 
  • कपिला गाय पीली वस्तुओं के व्यापार में लाभ दर्शाती है। 
  • लाल गाय लाल वस्तुओं के व्यापार में लाभ दर्शाती है। 
  • चितकबरी गाय सौदागरी के कार्य से लाभ दर्शाती है। 
  • गाय का अगर दूध दुहा जा रहा हो तो यह सभी प्रकार की कामनाओं की पूर्ति के लक्षण हैं।
  • ग्वाला दूध दुह कर बर्तन को भरा हुआ रखता है तो संपत्ति प्राप्त होगी। वहीं बर्तन को खाली रखना धन हानि का सूचक है। अगर गाय दूध दुहते समय लात चलाती है धन लाभ में बाधा का प्रतीक होती है। 
  • समागम करती हुई गाय को देखने से द्रष्टा को भावी संतान प्राप्त होने की आशा होती है। 
  • रंभाती हुई गाय सामान्य फल प्रदर्शित करती है। 
  • बछड़े को प्यार करती हुई गाय देखने से संतान सुख होता है। 
  • घी, दही, पनीर जैसे दुग्ध उत्पाद देखना भी निकट भविष्य में धन-संपत्ति प्राप्ति का सूचक है।