Friday, November 22, 2013

ग्रहों के विषय

सभी ग्रह अपने कारकत्व के अनुरूप अपनी दशा/अंतर्दशा (भुक्ति) में जातक पर प्रभाव डालते हैं :-
  1. सूर्य आत्मा, पिता, पद, प्रतिष्ठा, स्वास्थय व शक्ति (शारीरिक व आत्म बल) के साथ धन व लक्ष्मी का कारक है. 

  2. चंद्रमा से मन, बुद्धि, राजकृपा तथा धनसंपदा का विचार किया जाता है. 

  3. मंगल से पराक्रम, परिश्रम, संघर्ष शक्ति, अनुज, भूमि, शत्रु, रोग व चचेरे भाई का ज्ञान होता है. मंगल बली होने पर जातक अपने पराक्रम से सुख व सफलता पता है. 

  4. बुध विद्या, बुद्धि, बंधू, माया, मित्र, मनोरंजन, वाणी, कार्यक्षमता का कारक है. अतः शुभ होने पर अपनी दशा अंतर्दशा में बुध मौज मस्ती कराएगा मित्र मण्डली का सुख देगा.

  5. गुरु ज्ञान, प्रजा, धर्म, धन, संतान, शरीर की पुष्टि, मंत्रोपासना का कारक है. गुरु अपनी अंतर्दशा में प्रायः स्नेह, सहयोग, सुख व समृद्धि देता है. जातक की धर्म में रूचि होती है. 

  6. शुक्र वस्त्राभूषण, दांपत्य सुख, पत्नी से सम्बन्ध, सुख वैभव तथा वहाँ का कारक होता है. शुभ शुक्र अपनी दशा में सुख, समृद्धि व दांपत्य सुख देता है. 

  7. शनि आयु, जीवन, जीविका (नौकरी), दस-दासी या दुःख देता है. मृत्यु व विपत्ति का विचार भी शनि से होता है. कालपुरुष का लग्न, शनि की नीच राशि है. अतः इसे काल पुरुष का दुःख माना गया है. बहुधा शनि विलम्ब या बाधा देता है. 

  8. राहू से दादा का विचार किया जाता है. तीसरे भाव अथवा मिथुन/वृष राशि का उच्चस्थ राहू साहस पराक्रम बढ़ाता है. 

  9. केतु से नाना का विचार किया जाता है. द्वादश भाव का केतु मोक्षदायी व मुक्ति कारक माना गया है. केतु अपनी दशा/भुक्ति में प्रायः अनिष्ट व अशुभ से छुटकारा दिलाया करता है. 

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